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पीर नूरानी दरगाह की करीब 80 बीघा भूमि के नामांतरण और बिक्री पर उठे सवाल, कथित भू-माफियाओं द्वारा वक्फ भूमि बेचने के आरोप, अब जांच और कार्रवाई की तैयारी


उज्जैन/तराना। उज्जैन जिले की तहसील तराना अंतर्गत ग्राम नाटाखेड़ी में पीर गदा नूरानी दरगाह से जुड़ी करीब 80 बीघा भूमि के नामांतरण और बाद में उसके विभिन्न हिस्सों की बिक्री का मामला सामने आया है। भूमि के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव तथा कथित रूप से वक्फ बोर्ड से जुड़े आदेशों के आधार पर किए गए नामांतरण को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जाता है कि उक्त भूमि पुराने राजस्व अभिलेखों में पीर दरगाह नूरानी के नाम से दर्ज रही है। रिकॉर्ड में स्वामी के रूप में मुजावर तथा व्यवस्थापक के रूप में कलेक्टर का उल्लेख होने की बात सामने आई है। ऐसे में भूमि के बाद में हुए नामांतरण और बिक्री की प्रक्रिया किस आधार पर की गई, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
वक्फ भूमि के हस्तांतरण को लेकर सवाल:——
वक्फ कानून के प्रावधानों के अनुसार वक्फ संपत्ति के संबंध में हस्तांतरण और बिक्री पर विशेष कानूनी प्रतिबंध लागू होते हैं। ऐसे में यदि संबंधित भूमि वास्तव में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज थी, तो उसके नामांतरण एवं बाद में विभिन्न हिस्सों की बिक्री किस आदेश और किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई, इसकी जांच आवश्यक है।
मामले में अब मूल राजस्व रिकॉर्ड, वक्फ से संबंधित अभिलेख, नामांतरण आदेश, बिक्री दस्तावेज और पुराने राजस्व रिकॉर्ड का आपस में मिलान किए जाने की आवश्यकता सामने आ रही है।
1925-26 से रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण:——

मामले की पड़ताल में वर्ष 1925-26 से चले आ रहे पुराने राजस्व अभिलेखों का उल्लेख सामने आया है। इनमें खसरा क्रमांक 59, 63, 64, 65, 106/1 एवं 106/2 सहित अन्य खसरों का उल्लेख बताया गया है।
इसी प्रकार तराना क्षेत्र से संबंधित खसरा क्रमांक 166, 609, 610, 611, 612, 613, 614, 615, 619 तथा 610/1388 आदि का भी दस्तावेजों में उल्लेख होने की जानकारी सामने आई है। विवादित भूमि का संबंध नाटाखेड़ी तथा कड़वा-तराना क्षेत्र से बताया जा रहा है।

वर्ष 2000 और 2010 के आदेश भी जांच के दायरे में:——

पड़ताल के दौरान वर्ष 2000 एवं 2010 में पारित कुछ आदेशों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रकरण क्रमांक 1417/96 दिनांक 16 जून 2000 तथा 954/2000 दिनांक 10 अगस्त 2010 सहित वर्ष 2013 से संबंधित दस्तावेजों का भी उल्लेख सामने आया है।
इन दस्तावेजों की प्रमाणिकता, उनके आधार पर किए गए राजस्व रिकॉर्ड के बदलाव तथा भूमि के स्वामित्व में हुए परिवर्तन की वास्तविक स्थिति सक्षम स्तर पर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचाया जाएगा मामला:——

करीब 80 बीघा भूमि से जुड़े इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद हमारी टीम द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर पड़ताल किए जाने की बात कही गई है। प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड में भूमि के नामांतरण एवं उसके बाद हुए हस्तांतरण को लेकर कई प्रश्न सामने आए हैं।
मामले को संबंधित उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि मूल अभिलेखों के आधार पर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति:—–
इस पूरे मामले में भूमि के वास्तविक स्वामित्व, नामांतरण की प्रक्रिया, दस्तावेजों की प्रमाणिकता तथा कथित वक्फ आदेश की वैधानिक स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदु जांच के दायरे में हैं।
यदि 1925-26 से वर्तमान तक के मूल राजस्व अभिलेखों, वक्फ रिकॉर्ड, नामांतरण आदेशों और भूमि से संबंधित बिक्री दस्तावेजों का क्रमवार मिलान किया जाता है, तो रिकॉर्ड में हुए बदलावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
फिलहाल संबंधित व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों और दस्तावेजों की प्रमाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि जांच प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। भूमि के स्वामित्व एवं हस्तांतरण को लेकर अंतिम स्थिति सक्षम प्रशासनिक अथवा न्यायिक प्रक्रिया में ही निर्धारित होगी।

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