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भाजपा के ‘शिव भैया’ की अनदेखी क्यों? जिस समर्पित कार्यकर्ता ने संगठन के लिए जीवन खपा दिया, आज वही सम्मान और जिम्मेदारी की बाट क्यों जोह रहा है.?

  • देवास। भाजपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की जब भी चर्चा होती है, देवास के वरिष्ठ भाजपा नेता शिवनारायण शर्मा ‘शिव भैया’ का नाम प्रमुखता से सामने आता है। वर्षों से पार्टी के लिए संघर्ष, जनसेवा और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले शिव भैया आज भी पार्टी के प्रति उसी समर्पण के साथ खड़े हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उनकी अनदेखी क्यों?
    शिव भैया का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। उनके समर्थकों के अनुसार कांग्रेस शासनकाल में राजनीतिक गतिविधियों के दौरान उन पर कई प्रकरण दर्ज हुए। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व पर रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
    देवास की प्रसिद्ध टेकरी क्षेत्र की दुकानों से जुड़े मामले में भी शिव भैया ने दुकानदारों के पक्ष में आवाज उठाई और आंदोलन किया। बताया जाता है कि इस संघर्ष के बाद दुकानदारों को स्थायी व्यवस्था दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन और अनशन करना उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन गया।
    महाराज के लिए त्याग की मिसाल
    स्वर्गीय महाराज तुकोजीराव पवार के प्रति शिव भैया की निष्ठा भी देवास की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय रही। समर्थकों के अनुसार, जब महाराज तुकोजीराव पवार को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला तो शिव भैया ने विरोध स्वरूप कई वर्षों तक जूते-चप्पल त्याग दिए। पैरों में छाले पड़ने के बावजूद उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। बाद में जब महाराज को मंत्रिमंडल में स्थान मिला तो स्वयं महाराज ने उन्हें जूते-चप्पल पहनाए।
    यह प्रसंग आज भी उनके समर्थक शिव भैया के राजनीतिक समर्पण और निष्ठा के उदाहरण के रूप में याद करते हैं।
    हर चुनाव में संगठन के लिए सक्रिय भूमिका
    विधानसभा हो या लोकसभा, नगर निगम हो या कृषि मंडी, पंचायत हो या जिला पंचायत—शिव भैया ने विभिन्न स्तरों पर पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उनके समर्थकों का कहना है कि उनके वार्ड में भाजपा का पार्षद लगातार विजयी होता रहा और इसके पीछे उनकी जमीनी सक्रियता तथा संगठन के प्रति पकड़ महत्वपूर्ण रही।
    क्षेत्र की समस्याओं को लेकर वे लगातार जनता के बीच रहे और तत्कालीन भाजपा नेतृत्व के साथ मिलकर समाधान कराने का प्रयास करते रहे। यही वजह है कि उन्हें देवास में ‘अनशन वाले नेता’ के रूप में भी पहचान मिली।
    थावरचंद गहलोत ने भी की थी प्रशंसा
    पूर्व सांसद एवं वर्तमान राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा एक सभा में शिव भैया की सक्रियता की प्रशंसा किए जाने की बात भी उनके समर्थक आज याद करते हैं। उनके अनुसार, गहलोत ने शिव भैया जैसे समर्पित कार्यकर्ता की सक्रियता को सराहा था।
    स्वर्गीय महाराज तुकोजीराव पवार ने भी टेकरी की दुकानों के पक्ष में शिव भैया द्वारा किए गए आंदोलन और अनशन को लेकर उनकी जनसेवा की भावना की प्रशंसा की थी—ऐसा उनके समर्थकों का कहना है।
    आज फिर वही संकल्प, फिर वही संघर्ष
    वर्तमान में भी शिव भैया का एक संकल्प चर्चा में है। उनके समर्थकों के अनुसार, राजमाता विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने से वे पिछले करीब दो वर्षों से जूते-चप्पल नहीं पहन रहे हैं। उन्होंने मां चामुंडा के समक्ष संकल्प लिया है कि जब तक राजमाता विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलता, तब तक वे जूते-चप्पल धारण नहीं करेंगे।
    बताया जाता है कि लगातार नंगे पैर रहने के कारण उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं और स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद उनका संकल्प जारी है।
    ‘शिव’ नाम है, भोले स्वभाव के हैं, मांगते कुछ नहीं—बस सेवा करते हैं
    शिव भैया के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने भाजपा को केवल राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन का मिशन मानकर काम किया है। उन्होंने संगठन के लिए संघर्ष किया, जनता के मुद्दे उठाए और पार्टी के नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
    अब सवाल देवास भाजपा से लेकर पूरे जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है—
    क्या इतने लंबे समय तक संगठन के लिए समर्पित रहने वाले कार्यकर्ता को सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए?
    क्या शिव भैया की सक्रियता, संघर्ष और समर्पण को पार्टी नेतृत्व नजरअंदाज कर रहा है?
    क्या भाजपा संगठन ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित राजनीतिक दायित्व देकर सम्मानित करेगा?
    ये सवाल केवल शिव भैया के समर्थकों के नहीं, बल्कि देवास की राजनीति को करीब से देखने वालों के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
    भाजपा का पौधा जब जड़ों से मजबूत होकर वटवृक्ष बनता है, तो उसके पीछे हजारों ऐसे कार्यकर्ताओं का योगदान होता है, जो बिना किसी पद और अपेक्षा के वर्षों तक संगठन के लिए काम करते हैं। शिवनारायण शर्मा ‘शिव भैया’ भी उन्हीं समर्पित कार्यकर्ताओं में एक नाम होने का दावा रखते हैं।
    अब देखना यह है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व, जिला भाजपा नेतृत्व और नगर संगठन उनके समर्पण का सम्मान कब करता है और उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका को नई पहचान कब देता है।
    फिलहाल शिव भैया की अनदेखी देवास के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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