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प्रधानमंत्री आवास के नाम पर पंचायतकर्मी सरकार की आखों मे झौंक रहे धुल

खातेगांव (संदीपसिंह तोमर)। सरकारें ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने के लिए लाख जतन कर ले लेकिन पंचायत स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी आंखों में धूल झोंकने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
ताजा मामला खातेगांव जनपद की लीली पंचायत से सामने आया है। जहां प्रधानमन्त्री आवास के नाम पर कई लापरवाहियां और गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं। लापरवाही के एक-दो नहीं कई मामले हैं।
शासन की ओर से मिले लक्ष्य पूरा करने के दबाव में गलत जानकारी एप्स के माध्यम से सरकारी पोर्टल पर भरी जा रही है।

प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को चार चरणों में सहयोग राशि का भुगतान होता है। पहली किश्त 25 हजार की, दूसरी और तीसरी किश्तें 40 हजार की और चौथी किश्त मकान/आवास का काम पूरा हो जाने के बाद 15 हजार की हितग्राही के बैंक अकाउंट में डाली जाती है। जिसमे मकान पर प्लास्टर होने और दरवाजे लगने के काम भी शामिल हैं।

पहले से पंचायत स्तर पर होती आयी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने इस योजना में किश्त डालने से पहले मकान की अलग-अलग स्तर पर फोटो खींचकर जिओ टेग करने का ऑप्शन शुरू किया।
इतनी कंट्रोलिंग करने के बाद भी कर्मचारी अपनी कलाकारी दिखा ही देते हैं।

लीली पंचायत में ही कुछ प्रधानमंत्री आवास अभी तक बिना छत के हैं, जिन्हे लक्ष्य पूरा करने के दबाव में 5 माह पहले ही पूर्ण दिया गया और 28 जनवरी को उसकी आखिरी किश्त डाल भी दी गयी। एप्स के जरिए पोर्टल पर डाली गयी तस्वीर को इस एंगल से खींचा गया है कि वह मकान पूर्ण जैसा दिखे। फ़ोटो देखकर एक बार तो उस पर कोई भी उस पर शक नहीं कर सकता। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। पोर्टल पर अपलोड की गयी फोटो में मकान जो हिस्सा दिख रहा है सिर्फ उसी पर प्लास्टर कर सफेद कलर कर दिया गया और फ़ोटो लेते समय छत वाला हिस्सा आने ही नही दिया।

गाँव के चन्दर सिंह पिता मांगीलाल के आवास को जनवरी में ही पूर्ण बताकर 28 जनवरी को उसके खाते में आखिरी किश्त 15 हजार रूपये की डाल दी गयी।

पंचायत के रोजगार सहायक बलराम धनवारे दबी जुबान से कह रहे हैं कि जिले और जनपद को दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऐसी कारस्तानी करनी पड़ी। लेकिन ऐसे प्रधानमंत्री आवास जिनमे कुछ काम बाकी रह गया था उन्हें शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।

वहीं पंचायत वासियों के गले नहीं उतर रहा कि पात्र हितग्राहियों को तो चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और दूसरी तरफ ऐसे व्यक्ति को जिसके पास लीली पंचायत के ग्राम कुमनगांव के साथ ही कन्नौद के पते के भी परिचय पत्र (याने दो-दो वोटर आईडी कार्ड) है
और कन्नौद नगर में पक्का मकान है उसे कैसे योजना का लाभ दिया जा रहा है।

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वहीं इसी पंचायत के हरिओम पिता रामवतार ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की है कि प्रधानमन्त्री आवास की सूची में आये उसके नाम की जगह गाँव के ही एक अन्य हरिओम पिता रामदेव को इसका लाभ दे दिया गया, जबकि उसका नाम पात्रता सूची में ही नहीं था।
इस मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव बलराम जाट का कहना है कि पहले सूची में सिर्फ नाम और वर्ग का उल्लेख होता था, पिता का नाम नही लिखा होता था। गांव में उसी वर्ग से हरिओम नाम के दो व्यक्ति थे। उसमें से एक को इस योजना का लाभ मिल गया। शिकायत कर्ता का नाम अगली सूची में जुड़ा हुआ है, चुनाव के बाद जैसे ही नया लक्ष्य आवंटित होगा उसे इस योजना का लाभ मिल जाएगा।

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