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एमजी हास्पिटल जो अपनी बदहाली पर खुद आंसु बहा रहा है, यहां कलेक्टर जेडी,कमिश्नर, मंत्री का दौरा हमेशा चलता रहता हैं उसके बावजूद भी समस्याएं ज्यो की त्यों बनी है



देवास। देवास का एकमात्र शासकीय महात्मा गांधी चिकित्सालय जहाँ हर सप्ताह कलेक्टर दौरा करते हैं कमिश्नर आते है कभी कभी मंत्री या कोई उच्च अधिकारी यहां समय समय पर दौरा करते ही रहतें है लेकिन यहां कि समस्याएं ज्यों कि त्यों बनी रहती है। यहां रोज करीब 12 सौ से अधिक मरीज आतें है लेकिन उचित इलाज न मिल पाने पर रोते कोंसते चलें जाते है यहां के अधिकांश डाक्टर अपने निजी क्लिनिक या नर्सिंग होम चला रहे हैं जो यहां से रैफर कर अपने क्लिनिक पर आने का कहतें हैं । एक महिला डाक्टर को तो पिछले साल कलेक्टर आशिषसिंह के निर्देश पर ड्यूटी समय घर से इलाज करते रंगे हाथ पकडा था ।

यहां मरीजों की लम्बी लम्बी लाइन लगी रहती है ओर संबंधित डाक्टर गायब रहते हैं।जिसकी शिकायत मंत्री से भी की गई ।जिससे मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने भी नाराजगी जाहिर की थी तथा यहां से मरीजों को अन्य जगह रैफर न करते हुए यही इलाज पर जोर दिया था।जब यहां हर साल करोड़ों रुपये का बजट आता है फिर भी यहां समस्याए खत्म होने का नाम ही नहीं लेती, वर्षों हो चुके अनेक सीएमओ सिविल सर्जन बदल गए लेकिन समस्या वहीं की वहीं हैं बताया गया यहां लाखों खर्च कर प्रतिवर्ष शौचालय का निर्माण होता है उसमें से कईयों के तो आजतक दरवाजे भी नहीं खुले हैं यहां केवल कमिशन के चक्कर मे निर्माण होता रहता हैं, यहां के चेम्बर जो बने तो हैं लेकिन उचित निकासी नही होने से रोड पर ही शौचालय का पानी बहता रहता है।यहां एकमात्र नाला है जो आगे जाकर बंद है ओर ओर इसनाले मे देवास सिटी हास्पीटल,सुर्या हास्पिटल आदि ने भी गंदा पानी छोड रखा है जो एमजी हास्पिटल मे भरा रहता है यहां मरिजो के परिवारजनो के लिए खानाखाने का स्थान आहार सेवा कैन्द्र है जहाँ ये तमाम मख्खी मच्छर आतें है ओर उस खाने पर मंडराते रहते हैं ओर वहीं खाना लोग खाते है लेकिन हास्पिटल प्रशासन ने कभी यहां सफाई करने का कभी नहीं सोंचा हैं।यहां के प्रशासन ने हमेशा ये सोंचा कि अधिक कमिशन कहा से मिले जो काम हम करें।यहां कि विद्युत व्यवस्था के लिए जो एकमात्र डीपी है वह पुरी तरह जीर्णशीर्ण अवस्था में हो चुकी है वहां लगी केबल से प्लास्टिक सड़ चुकी है जिस कारण यहां कभी भी भयंकर हादसा हो सकता है ।इसकी देखरेख की प्रशासन कोई जिम्मेदारी ही नहीं ले रहा है । पूर्व प्रभारी सीएमओ डाँ सरल यहां से ट्रांसफर होने से धार जा चुके हैं अब नए सीएमओ जो राजगढ़ ब्यावरा से आए हैं जिनके सामने समस्याओं का अंबार है ।

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